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17 May 2011 | Prashan Rai | New York
जब सारा दुनियाँ निदाउथे ,
म थाकेर चुर भएका
तिम्रा, पाउहरु दबाउथे
चाहे तिमी कामबाट थाकेर आउ ,
या यात्राबाट
म जिज्ञासु, तिमीलाई बार्तामा भुलाउथे । Read More »
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17 July 2010
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चैत २६ | Srijana Kendel | Kathmandu
गणतन्त्र अडिराछ Read More » |
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06 February 2010
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Dec.25, 2009 | prashan | New York
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11-11-2009 | repoter | kathmandu
बराक ओबामालई एउटा चिठ्ठी लेख्न मन छ
तिम्रो परिवर्तनले केही लछार पाटो लाउने छैन
बराक ओबामालाई एउटा प्रश्न सोध्न मन छ
तिमी बराक हुसेन हौ कि सद्दाम हुसैन
बुशको सेतो गध्दि नै रोज्यौ किन? Read More » |
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11-11-2009
कविता : अध्यक्ष आवश्यक्ता -सूर्यराज गिरी Read More » |
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